$show=home

BREAKING NEWS
Loading latest news...

$show=home

लोड हुँदैछ...

भोग और संग्रह की दौड़ में जीवन का असली उद्देश्य न भूलें : बिमल सर्राफ

 भोग और संग्रह की दौड़ में जीवन का असली उद्देश्य न भूलें : बिमल सर्राफ रक्सौल, पूर्वी चंपारण। मनुष्य का जीवन केवल धन, संपत्ति और सुख-सुविधाओ...

 भोग और संग्रह की दौड़ में जीवन का असली उद्देश्य न भूलें : बिमल सर्राफ

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

मनुष्य का जीवन केवल धन, संपत्ति और सुख-सुविधाओं को जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि दूसरों के काम आने और अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए भी है। हमारे पास जो कुछ भी है, वह केवल हमारी मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और समाज के सहयोग का भी हिस्सा है। इसलिए जीवन में भोग और संग्रह से अधिक महत्व सेवा, त्याग और समर्पण का होना चाहिए।

आज इंसान धन, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाओं की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि उसे अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य का ध्यान ही नहीं रहता। वह अपनी हर उपलब्धि को अपनी योग्यता और मेहनत का परिणाम मानकर अहंकार करने लगता है। जबकि सच्चाई यह है कि धन, पद, प्रतिभा और अधिकार सब कुछ स्थायी नहीं हैं। जो आज हमारे पास है, वह कल किसी और के पास भी हो सकता है।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने व्यक्त किया।

ईश्वर ने हमें जो भी साधन, संपत्ति, ज्ञान और क्षमता दी है, उसका सदुपयोग करना ही सच्ची समझदारी है। जरूरत से अधिक संग्रह करने और हर वस्तु पर अपना अधिकार जताने की भावना मनुष्य को स्वार्थी बना सकती है। इसके विपरीत, जरूरतमंदों की सहायता करना, दूसरों के दुख को समझना और अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करना जीवन को सुंदर बनाता है।


हमें यह समझना चाहिए कि किसी वस्तु का वास्तविक महत्व उसके संग्रह में नहीं, बल्कि उसके सही उपयोग में है। यदि हमारे पास धन है तो उसका कुछ हिस्सा जरूरतमंदों के काम आना चाहिए। यदि हमारे पास ज्ञान है तो उसे दूसरों तक पहुंचाना चाहिए। यदि हमारे पास समय और सामर्थ्य है तो उसका उपयोग समाज की भलाई के लिए करना चाहिए।


सच्चा त्याग केवल अपनी वस्तुओं को छोड़ देना नहीं, बल्कि उनके प्रति अहंकार और स्वामित्व की भावना को कम करना भी है। जब हम किसी की सहायता करते हैं, तो उसके बदले प्रशंसा, सम्मान या प्रतिफल की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। सेवा का वास्तविक आनंद तभी मिलता है, जब उसमें निस्वार्थ भाव और विनम्रता हो।


जीवन में सबसे बड़ी उपलब्धि अधिक से अधिक धन जुटाना नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्तित्व बनाना है, जिससे दूसरों के जीवन में भी खुशियां आएं। हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए स्वयं को ईश्वर का निमित्त मानना चाहिए। इससे हमारे भीतर अहंकार के स्थान पर विनम्रता और संग्रह की जगह सेवा का भाव विकसित होगा।

अंततः जीवन की सार्थकता इस बात में नहीं है कि हमने कितना पाया और कितना संचित किया, बल्कि इस बात में है कि हमने अपने पास उपलब्ध साधनों से कितनों के जीवन में खुशियां बांटीं। जब मनुष्य भोग से ऊपर उठकर सेवा, प्रेम, त्याग और समर्पण को अपनाता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सफल और संतोषपूर्ण बनता है।

COMMENTS

यो समाचार पढेर तपाईंलाई कस्तो अनुभूति भयो ?

× तपाईंले यो समाचार पढ्न छुटाउनुभयो?
सबै पोस्टहरू लोड गरियो कुनै पनि पोस्ट भेटिएन सबै हेर्नुहोस् थप पढ्नुहोस् जवाफ दिनुहोस् जवाफ रद्द गर्नुहोस् मेटाउनुहोस् द्वारा गृहपृष्ठ पृष्ठहरू पोष्टहरू सबै हेर्नुहोस् तपाईंको लागि सिफारिस गरिएको category अभिलेख खोज्नुहोस् सबै पोस्टहरू तपाईंको अनुरोधसँग मिल्दो कुनै पनि पोस्ट फेला परेन। घर फर्कनुहोस् Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers पछ्याउनुहोस् यो प्रिमियम सामग्री लक गरिएको छ। STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content