सही को सही और गलत को गलत कहना ही जीवन की सच्ची पहचान -बिमल सर्राफ
रक्सौल पूर्वी चंपारण -
मनुष्य की सच्ची पहचान उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके विचारों, व्यवहार और कर्मों से होती है। जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस बनाए रखना ही सच्ची समझ है। सत्य का मार्ग कठिन जरूर हो सकता है, लेकिन यही जीवन को सही दिशा देता है।
कर्म परछाईं की तरह हमेशा हमारे साथ रहते हैं। इसलिए हमें ऐसे श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए, जिनकी छाया शीतल हो और जिनसे दूसरों के जीवन में भी सुख-शांति आए। प्रकृति का नियम है कि हम दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, उसका प्रभाव किसी न किसी रूप में हमारे जीवन पर भी पड़ता है।
उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
दौलत इंसान के रहन-सहन का तरीका बदल सकती है, लेकिन बुद्धि, नीयत और संस्कार नहीं। इसलिए धन से अधिक महत्व अच्छे विचार और साफ नीयत का है। रिश्तों में भी नए संबंध बनने से अधिक जरूरी है कि पुराने रिश्तों में विश्वास और अपनापन बना रहे। संबंधों में प्रेम और संवाद रहेगा तो उनमें मिठास बनी रहेगी, लेकिन अहंकार और संदेह की गांठ रिश्तों का रस समाप्त कर देती है।
मन में छिपा कपट और नकारात्मकता बाहर की चोट से भी अधिक पीड़ादायक होती है। इसी तरह शब्द भले ही मुफ्त मिलते हैं, लेकिन उनका प्रभाव बहुत मूल्यवान होता है। सोच-समझकर बोले गए शब्द रिश्तों को मजबूत करते हैं, जबकि कटु शब्द वर्षों के संबंधों में दरार डाल सकते हैं।आज तनाव का एक कारण गलत को सही साबित करने की कोशिश भी है। यदि मनुष्य दूसरों की गलतियां खोजने के साथ स्वयं का आत्मविश्लेषण करना सीख ले और अपनी भूल स्वीकार करने का साहस रखे, तो जीवन की अनेक समस्याएं कम हो सकती हैं। अपने चित्त को सार्थक कार्यों में व्यस्त रखना भी चिंता और नकारात्मकता से बचने का प्रभावी उपाय है।खुले विचारों वाला व्यक्ति अपनी मान्यताओं को दूसरों पर थोपता नहीं, बल्कि अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने और स्वीकार करने का प्रयास करता है। यही सोच समाज में संवाद, सम्मान और सौहार्द को बढ़ाती है।



वास्तव में जीवन एक पुस्तक की तरह है, जिसके प्रत्येक पन्ने पर कोई न कोई अनुभव और सीख लिखी होती है। सुख हो या दुख, सफलता हो या असफलता—हर परिस्थिति हमें कुछ सिखाती है। इसलिए जीवन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि हम कर्मों में श्रेष्ठता, शब्दों में मधुरता, विचारों में स्पष्टता और संबंधों में विश्वास बनाए रखें। यही जीवन को सरल, शांत और सार्थक बनाने का मार्ग है।




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