$show=home

BREAKING NEWS
Loading latest news...

$show=home

लोड हुँदैछ...

रिश्तों की उम्र संपर्क से नहीं, संवाद और विश्वास से बढ़ती है--बिमल सर्राफ

रिश्तों की उम्र संपर्क से नहीं, संवाद और विश्वास से बढ़ती है--बिमल सर्राफ रक्सौल, पूर्वी चंपारण। मनुष्य कितना भी आत्मनिर्भर क्यों न हो, वह र...


रिश्तों की उम्र संपर्क से नहीं, संवाद और विश्वास से बढ़ती है--बिमल सर्राफ

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

मनुष्य कितना भी आत्मनिर्भर क्यों न हो, वह रिश्तों के बिना पूर्ण जीवन नहीं जी सकता। परिवार, मित्र, जीवनसाथी, गुरु, सहकर्मी और समाज से जुड़े संबंध जीवन को भावनात्मक आधार देते हैं। सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचने के बाद भी यदि उसे अपनी खुशी बाँटने वाला कोई अपना न मिले, तो उपलब्धियाँ अधूरी-सी लगने लगती हैं। इसलिए रिश्तों को बनाए रखना केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि जीवन की सुंदरता भी है।

आज के समय में रिश्तों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। व्यस्तता, प्रतिस्पर्धा, आर्थिक दबाव और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता ने लोगों को एक-दूसरे के करीब होकर भी भावनात्मक रूप से दूर कर दिया है। मोबाइल और सोशल मीडिया ने संवाद के साधन तो बढ़ा दिए, लेकिन मन की बात सुनने और समझने का समय कम कर दिया। कई परिवारों में लोग एक ही छत के नीचे रहते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त दिखाई देते हैं।

उक्त विश्लेषण लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

वास्तव में रिश्तों में बड़ी दरार अक्सर किसी बड़ी घटना से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी गलतफहमियों से पैदा होती है। किसी की बात को गलत अर्थ में लेना, पूरी बात सुने बिना निष्कर्ष निकाल लेना, मन की बात स्पष्ट न करना या संदेह को भीतर पालते रहना धीरे-धीरे दूरी बढ़ाता है। इसलिए रिश्तों को मजबूत रखने के लिए खुला संवाद सबसे जरूरी आधार है।


संवाद का अर्थ केवल बोलना नहीं, बल्कि सामने वाले को ध्यान से सुनना और उसकी भावनाओं को समझना भी है। कई बार व्यक्ति सलाह नहीं, केवल यह चाहता है कि कोई उसकी बात बिना निर्णय सुन ले। एक संवेदनशील बातचीत मन का बोझ हल्का कर सकती है और वर्षों से बनी दूरी को भी कम कर सकती है।


रिश्तों की दूसरी मजबूत नींव विश्वास है। जहाँ विश्वास होता है, वहाँ छोटी-छोटी परेशानियाँ बड़ी नहीं बनतीं। लेकिन जहाँ हर बात में संदेह हो, वहाँ सामान्य बातचीत भी विवाद का कारण बन सकती है। विश्वास एक दिन में नहीं बनता; यह निरंतर अच्छे व्यवहार, ईमानदारी और जिम्मेदारी से धीरे-धीरे मजबूत होता है।


रिश्तों को बचाने के लिए अहंकार को पीछे छोड़ना भी जरूरी है। कई बार दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात को अंतिम सत्य मान लेते हैं और बातचीत बंद कर देते हैं। परिणाम यह होता है कि छोटी-सी बात बड़ी दूरी में बदल जाती है। ऐसे समय में पहल करना कमजोरी नहीं, बल्कि रिश्ते के प्रति संवेदनशीलता का प्रमाण है। एक छोटी-सी पहल, एक सच्ची माफी या प्रेम से कही गई बात वर्षों पुराने संबंध को टूटने से बचा सकती है।


हालाँकि रिश्तों को निभाने का अर्थ हर गलत व्यवहार को स्वीकार कर लेना नहीं है। जहाँ लगातार अपमान, हिंसा, धोखा या शोषण हो, वहाँ अपनी सुरक्षा, सम्मान और गरिमा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। क्षमा का अर्थ अन्याय को उचित ठहराना नहीं, बल्कि अपने मन को कटुता से मुक्त करना है। स्वस्थ रिश्तों में प्रेम के साथ सम्मान और सीमाओं की समझ भी जरूरी है।


हर व्यक्ति का स्वभाव, सोच और परिस्थितियाँ अलग होती हैं। इसलिए रिश्तों में पूर्ण समानता की अपेक्षा करने के बजाय एक-दूसरे को समझने का प्रयास करना चाहिए। कभी सामने वाले की बात मान लेना, कभी अपनी बात समझाना और कभी परिस्थितियों को समय देना—यही रिश्तों को परिपक्व बनाता है।


आज जरूरत इस बात की है कि हम रिश्तों को केवल संपर्कों की सूची न समझें, बल्कि उन्हें भावनाओं की जिम्मेदारी मानें। समय निकालकर अपनों से बात करें, उनकी बात सुनें, छोटी गलतियों को अनावश्यक विवाद न बनाएं और जहाँ संभव हो, संवाद का रास्ता खुला रखें।

रिश्ते संयोग से बनते हैं, लेकिन उन्हें मजबूत बनाए रखने के लिए संवाद, विश्वास, सम्मान और समझदारी की जरूरत होती है। जीवन की भागदौड़ कितनी भी बढ़ जाए, अपनों के लिए थोड़ा समय और मन में थोड़ी जगह बचाए रखना ही रिश्तों की सच्ची पूँजी है।

COMMENTS

यो समाचार पढेर तपाईंलाई कस्तो अनुभूति भयो ?

× तपाईंले यो समाचार पढ्न छुटाउनुभयो?
सबै पोस्टहरू लोड गरियो कुनै पनि पोस्ट भेटिएन सबै हेर्नुहोस् थप पढ्नुहोस् जवाफ दिनुहोस् जवाफ रद्द गर्नुहोस् मेटाउनुहोस् द्वारा गृहपृष्ठ पृष्ठहरू पोष्टहरू सबै हेर्नुहोस् तपाईंको लागि सिफारिस गरिएको category अभिलेख खोज्नुहोस् सबै पोस्टहरू तपाईंको अनुरोधसँग मिल्दो कुनै पनि पोस्ट फेला परेन। घर फर्कनुहोस् Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers पछ्याउनुहोस् यो प्रिमियम सामग्री लक गरिएको छ। STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content