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मनुष्य जीवन स्वयं में एक कल्पवृक्ष है- बिमल सर्राफ

मनुष्य जीवन स्वयं में एक कल्पवृक्ष है- बिमल सर्राफ रक्सौल, पूर्वी चंपारण। मनुष्य का जीवन अपने आप में एक कल्पवृक्ष है। इसमें व्यक्ति जैसी सोच...


मनुष्य जीवन स्वयं में एक कल्पवृक्ष है- बिमल सर्राफ

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

मनुष्य का जीवन अपने आप में एक कल्पवृक्ष है। इसमें व्यक्ति जैसी सोच, इच्छा और मेहनत का बीज बोता है, उसी के अनुरूप जीवन में परिणाम प्राप्त करने की संभावना बनती है। जरूरत केवल अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें सही दिशा देने की है।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद्, रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन असीम संभावनाओं से भरा हुआ है। ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी क्षमताएँ प्रदान की हैं, जिनका विकास और सही उपयोग करके वह अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। शास्त्रों में भी मनुष्य को ईश्वर का अंश और उसकी अनुपम रचना माना गया है।

मनुष्य के पास शरीर, समय और मन जैसी अनमोल शक्तियाँ हैं। इसके साथ उसकी कल्पना, इच्छा, विचार, भावना और अंतर्मन की चेतना उसे विशेष बनाती है। यदि इन शक्तियों का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो व्यक्ति अपने जीवन में बड़े से बड़ा परिवर्तन ला सकता है।जीवन को केवल परिस्थितियों के भरोसे छोड़ देना उचित नहीं है। परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, मनुष्य का संकल्प, पुरुषार्थ और सकारात्मक सोच उसके जीवन की दिशा बदल सकते हैं। जिस प्रकार एक बीज में विशाल वृक्ष बनने की संभावना छिपी होती है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सफलता, सेवा, सृजन और श्रेष्ठता की अनेक संभावनाएँ मौजूद रहती हैं।

इसलिए जीवन को समझना और उसका सदुपयोग करना आवश्यक है। समय का सम्मान, विचारों की शुद्धता, कर्म में ईमानदारी और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास व्यक्ति को उसकी इच्छित मंजिल तक ले जा सकते हैं। वास्तव में मनुष्य के भीतर मौजूद संभावनाएँ ही उसके जीवन का सबसे बड़ा धन हैं।


मनुष्य यदि स्वयं पर विश्वास करे, अपनी शक्तियों को पहचाने और उन्हें सही दिशा में लगाए तो उसके लिए कोई भी उपलब्धि असंभव नहीं रह जाती। यही कारण है कि मानव जीवन को दुर्लभ और श्रेष्ठ कहा गया है। अपने विचार, कर्म और पुरुषार्थ से व्यक्ति अपने जीवन को जैसा चाहे, वैसा आकार दे सकता है।

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