अपनी सुंदरता का आकलन दर्पण में नहीं, लोगों के दिलों में खोजें : बिमल सर्राफ
रक्सौल पूर्वी चंपारण -
जीवन में सादगी सबसे बड़ा आभूषण है। महानता और धन का अधिक दिखावा सादगी के प्रभाव को कम कर देता है, इसलिए व्यक्ति को दिखावे से दूर रहना चाहिए। उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322 ई के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।उन्होंने कहा कि जीवन में कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन हौसला बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि बाज भी बारिश के समय बादलों के ऊपर उड़ता है। इंसान की असली सुंदरता उसके चेहरे में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बसने वाले प्रेम और सम्मान में होती है।
बिमल सर्राफ ने कहा कि इस संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसे कोई समस्या न हो, और ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका कोई समाधान न हो। मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, उसका रास्ता हमेशा हमारे कदमों से ही शुरू होता है।उन्होंने कहा कि स्नेह और दया केवल सुख के साधन नहीं, बल्कि इंसानियत को जीवित रखने वाली आवश्यकताएँ हैं। कर्म करते समय संसार के साथ व्यवहार करें, लेकिन भीतर यह समझ बनी रहनी चाहिए कि संसार नश्वर है। ज्ञानयुक्त विचारों के साथ किए गए कर्म जीवन की उलझनों को कम कर देते हैं।उन्होंने आगे कहा कि जब मन विकारों से मुक्त होता है, तब बाहरी संसार भी हमें शांति का अनुभव कराता है। केवल बाहरी वस्तुओं को बदलने से जीवन में वास्तविक खुशी नहीं आती; बदलाव हमारे विचारों के साथ-साथ आचरण में भी दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदारियाँ उसी की परीक्षा लेती हैं जो उन्हें ईमानदारी से निभाता है। जो व्यक्ति प्रशंसा और निंदा दोनों में समान रहना सीख लेता है, उसके जीवन में आनंद और शांति कई गुना बढ़ जाती है। इंसान की पहचान केवल उसके रूप से नहीं, बल्कि उसकी वाणी और व्यवहार से भी होती है।
अंत में उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े चिकित्सक परमात्मा और समय हैं। सृष्टि का स्रोत हमारे भीतर है, इसलिए अनेक समस्याओं के समाधान भी हमारे अंदर ही छिपे हैं। जीवन एक संपूर्ण पुस्तक की तरह है, इसलिए उसके हर पन्ने को पढ़ते हुए सीख और आनंद के साथ आगे बढ़ना चाहिए।






COMMENTS