रक्सौल, पूर्वी चंपारण।
"सद्व्यवहार उस पुष्प के समान है, जो धवल एवं दृढ़ चरित्ररूपी वृक्ष पर खिलता है। इसकी सुगंध केवल व्यक्ति के व्यक्तित्व को ही नहीं, बल्कि समाज के वातावरण को भी सुवासित कर देती है।"उक्त प्रेरणादायी विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ( 322 ई ) के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन सह समाजसेवी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से बातचीत के दौरान व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि सद्व्यवहार शिष्टता, शालीनता, विनम्रता, संवेदनशीलता और आत्मीयता जैसे श्रेष्ठ मानवीय गुणों का समन्वित स्वरूप है। जिस व्यक्ति के जीवन में यह अमूल्य संपदा होती है, उसका लोक-व्यवहार स्वतः ही उत्कृष्ट बन जाता है। ऐसे व्यक्ति की सफलता केवल संयोग नहीं, बल्कि उसके श्रेष्ठ आचरण का स्वाभाविक परिणाम होती है।
श्री सर्राफ ने कहा कि सफलता ऐसे लोगों के कदम चूमती है और यदि कभी असफलता का सामना भी करना पड़े, तो वह उसे निराश नहीं करती, बल्कि आत्ममंथन का अवसर प्रदान करती है। यही अनुभव व्यक्ति को अपनी कमियों को पहचानने, उन्हें दूर करने तथा अधिक परिपक्व बनने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि व्यवहार ही वह अद्भुत शक्ति है, जो अपनों को और अधिक निकट तथा परायों को भी अपना बना देती है। मधुर वाणी और सौम्य व्यवहार से जब पशु-पक्षी तक प्रभावित हो जाते हैं, तब मनुष्य का हृदय जीतना कठिन नहीं रह जाता। जब अंतर्मन में प्रेम, करुणा और सद्भाव का संचार होता है, तब हृदय माखन की भाँति कोमल हो उठता है और वाणी से अमृत समान मधुरता झरने लगती है।
उन्होंने आगे कहा कि व्यवहार की शालीनता केवल दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ही नहीं लाती, बल्कि स्वयं के जीवन को भी आनंद, संतोष और आत्मिक शांति से भर देती है। पारसमणि के अस्तित्व पर मतभेद हो सकते हैं, किंतु प्रत्येक व्यक्ति के पास सद्व्यवहार रूपी ऐसी पारसमणि अवश्य होती है, जिसके स्पर्श से संबंधों में विश्वास, अपनापन और सम्मान का स्वर्णिम प्रकाश फैलाया जा सकता है।
अंत में श्री सर्राफ ने कहा कि श्रेष्ठ लोक-व्यवहार ही जीवन की वास्तविक पूंजी है। यही सफलता, सम्मान और महानता का दिव्य मंत्र है। यदि प्रत्येक व्यक्ति इसे अपने जीवन में आत्मसात कर ले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र—तीनों में सौहार्द, विश्वास और मानवता की नई चेतना का संचार हो सकता है।

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